चांदूर रेल्वे / शहेजाद खान /--
चांदूर रेल्वे एमआयडीसी में बडे उद्योग न होने से युवकों की बेकारी दिन दुगुनी बड रही है.5 ते10 युवाओं को रोजगार दे सकते ऐसे उद्योग चांदूर रेल्वे में 5 लग गये हैं, इस में भी कुशल और अनुभवी लोगों को प्राथमिकता दि जाती है.इस एमआयडीसी परिसर में जिनमाता कमर्शियल कपास का टीएमसी युनिट है जो 100 लोगों को काम उपलब्ध करा सकते हैं.पर इस युनिट को भी पाणी की समस्याओं का सामना करना पड रहा है. एमआयडीसी में किसी भी तरह की मुलभूत सुविधा नही हो ने के कारण बडे उद्योग व उद्योजक यहा आने से कतराते है पर जिन उद्योजक की आने की इच्छा जताई या पहल की उसके लिए इस एमआयडीसी में प्लॉट खाली नही है.जिस प्लाॅट पर तिन साल तक कोई उद्योग नही लगता उसे खाली करना चाहिए पर ऐसी कोई भी प्रक्रिया नही होती.इस लिए चांदूर शहर की एमआयडीसी आज भी भकास नजर आती है. लोकप्रतिनिधी, सांसद, पालकमंत्री या अधिकारीयों की अन देखी का शिकार हो रही है शहर की एमआयडीसी और उद्योजक. 30 वष्रे पहले चांदूर रेल्वे समूचे विदर्भ में उद्योग के नाम पर जाना जाता था, शहर में हाजी कासम जिनिंग प्रेसिंग, सहकारी यंशवत जिनिंग प्रेसिंग, मुरारका जिनिंग प्रेसिंग, डागा जिनिंग प्रेसिंग, के साथ हाजी कासम फल्ली तथा जवस तेल मिल भी शहर में थी.इस मिल में रेल्वे की लाईन भी डली थी, शहर की कृषी उपज मंडी में हजारों बोरों की आवक भी थी, आस पास के परिसर से बडी तादाद में कपास की आवक भी यहा आती थी पर आज उस पुराने वैभव को चांदूर रेल्वे तहसिल तरस रहा है.इस परिस्थिती के लिए स्थानीय जनता या लोकप्रतिनिधी इनमें से कोण जिम्मेदार है यह समज के परे है.पर इस क्षेत्र का युवक आज भी सुरक्षित बेरोजगार है यह बात उतनी ही सच है.

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