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Thursday, July 28, 2016

पारित हुआ बेनामी लेनदेन निषेध संशोधन बिल

लोकसभा ने बेनामी संपत्ति की रोकथाम के लिए बिल पास कर दिया है। इस बिल में सख्त सजा के साथ जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार के इस कदम से काले धन पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बिल के पेश करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य बेनामी संपत्ति पर लगाम लगाना है। उन्होंने सदन को बताया कि इस बिल के बाद से बेनामी संपत्ति रखने वालों को 7 साल तक की कैद हो सकती है। बिल पर चर्चा के दौरान ज्यादातर दलों ने इसका समर्थन किया और सरकार से कालेधन पर कडे कदम उठाने की मांग की। चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि मूल रूप से 1988 में ये कानून बनाया गया था लेकिन नियम नहीं बनाए गए और प्रणाली के अभाव में यह प्रभावी नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकान में साल 2011 में पुराने कानून में संशोधन के बजाय एक नया विधेयक लाया गया था, जिसके चलते साल 1988 से अब तक की संपत्तियां बिना दंडनीय कार्रवाई के रह जाती थी। इसलिए सरकार 1988 के मूल अधिनियम में ही संशोधन लेकर आई है।
उन्होंने कहा कि यह बिल इसलिए अहम है क्योंकि इसमें बेनामी संपत्ति की स्पष्ट परिभाषा है और सजा, जुर्माना तथा अपील के स्पष्ट प्रावधान हैं। देश में काला धन एक कलंक है और बेनामी संपत्ति इसे छिपाने का बड़ा ज़रिया है। ऐसे में इस विधेयक के पारित होने से काले धन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
आम तौर पर काले धन का निवेश दूसरे लोगों के नाम पर या ऐसे लोगों के नाम पर जमीन के लेनदेन में किया जाता है जिनका अस्तित्व ही नहीं है, ऐसे में यह बेनामी संपत्ति होती है। यह विधेयक ऐसे लोगों को रोकेगा और इसमें उन पर मुकदमे के साथ दंडनीय कार्रवाई का प्रावधान करेगा।
हिंदू अविभाजित परिवार और ट्रस्टों की संपत्तियों से जुड़े कुछ मामलो में छूट का भी प्रावधान है। प्रावधानों के तहत बेनामी संपत्ति मिलने पर 7 साल कैद की सजा हो सकती है और बेनामी संपत्ति के बाजार कीमत के 25 फीसदी तक जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 5 साल तक की सजा हो सकती है और संपत्ति की 10 फीसदी तक जुर्माना हो सकता है।
इस बिल के अलावा उच्च सदन में जंगलों के कटाव के बदले खाली ज़मीन पर पेड़ लगाने और वन्य जीवन को बचाने के लिये लाए जा रहे कैम्पा कानून पर चर्चा चल रही है। कैम्पा बिल लोकसभा से पास हो चुका है और सरकार इसे जल्द से जल्द राज्यसभा से पास कराना चाहती है।
इस प्रस्तावित कानून का मकसद उद्योग और कारखानों के लिए काटे गये जंगलों के बदले नए पेड़ लगाना और कमजोर जंगलों को घना और स्वस्थ बनाना है। कंपनियां वन भूमि के इस्तेमाल के बदले मुआवजे के तौर पर कंपनेसेटरी अफॉरेस्टेशन फंड में पैसा जमा करती हैं जिसके लिये कंपनसेटिव ऐफॉरेस्टेशन फंड बिल अर्थात कैम्पा (CAMPA) बनाया जा रहा है।
कानून के तहत सरकार कैम्पा को संवैधानिक दर्जा देगी जो फंड के इस्तेमाल का काम देखेगी। फंड का इस्तेमाल नए जंगल लगाने और वन्य जीवों को बसाने, फॉरेस्ट इकोसिस्टम को सुधारने के अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिये होगा। कैम्पा फंड में अब तक 40 हज़ार करोड़ से अधिक रुपया जमा हो चुका है।

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