चांदुर रेल्वे- (शहेजाद खान)-/

पवित्र माह रमजान आज से प्रारंभ हो गाया है। मस्जिदों में इस माह के लिए विशेष तैयारियां हो गईं हैं, नया रंग रोगन किया गया है। मुस्लिम समाज ने घरों में सजावट कर ली है। आज 7 जून को चांद देखते ही मुस्लिम समाज रोजे रखना शुरु कर दिए। साथ ही 30 वें दिन चांद देखकर ही रमजान महीना खत्म करेंगे। 6 जून को आसमान पर रमजान का चांद नजर आते ही तराबियों का दौर शुरू हो गया और रात्रि में सेहरी करके मुस्लिम धर्मावलंबियों ने रोजा रखा। खुदा की इबादत के महीने रमजान का चांद सोमवार को दिख गया। इसके साथ ही रमजान का पवित्र माह भी शुरू हो गया है। 10 जून को रमजान महीने के पहले जुमे की नमाज शहर के मस्जिदों में अदा की जाएगी। इस दिन मुस्लिम भाई रोजे रखकर मस्जिदों में खुदा की इबादत करेंगे। यह पाक महीना है। इस माह में खुदा की इबादत करने से अल्लाह की रहमत बरसती है।
रमजान का यह है महत्व -
रमजान अल्लाह की इबादत का महीना है। इस महीने में इबादत करने का महत्व आम महीनों की तुलना में कई गुना होता है। क्योंकि रमजान खाने और पानी को त्याग कर अल्लाह की इबादत करने का महीना है। इससे की इंसान भूखे की भूख और प्यासों की प्यास का महत्व समझ सके। साथ ही उनकी मदद करने के लिए तत्पर हो सके। - रोजे में नजरों से गलत न देखें, कानों से गलत न सुनें, जुबान से गलत न बोलें, दिल से, दिमाग से गलत न सोचें। ताकि रूह पवित्र हो सके। जब रूह और जिस्म पवित्र होगा। तब यह खुद भी समझा जा सकता है। एक रोजेदार दूसरे इंसानों के लिए भी हमदर्द होगा। और उसकी इबादत अल्लाह की बारगाह में कबूलियत का दर्जा हासिल करेगी। रहमतों और बरकतों का महीना रमजान है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। बुराइयों से तौबा कर अल्लाह की इबादत करने वाले माह रमजान का मुस्लिमों में खास महत्व है। रमजान का महीना बेहद पाक और रहमतों वाला होता है। रमजान में एक नेकी का सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है। नफिल इबादत का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है। रमजान में शयातीनों को अल्लाह कैद कर देता है ताकि लोग आसानी के साथ रोजा रख सकें, तरावीह अदा कर सके, और कुरआन पाक की तिलावत, जिक्र आदि इबादत के काम अंजाम दे सकें। रमजानका महीना 29 या 30 दिन का होता है। जो चांद दिखने के साथ शुरूहोता है अगला चांद दिखने के बाद दूसरे दिन ईद मनाई जाती है। रात के आखरी पहर सुबह सादिक से पहले सेहरई (हल्का खाना) खा करके रोजे की नीयत करके रोजा रखा जाता है। रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है।रोजा आंख, हाथ, पैर, दिल, मुंह सभी का होता है ताकि रोजा रखने वाला इंसान हमेशा बुराई से तौबा करता रहे। रोजा सूरज निकलने से लेकर सूरज डूबने तक का होता है। इस दौरान वह कुछ खा पी नहीं सकता। रोजे की शुरुआत में फजर की नमाज होती है। रोजा खोलने के वक्त मगरिब की नमाज होती है। रमजान की इबादतेंरमजान में रोजा अहम इबादत है। रमजान अल्लाह तआला का महीना है। अल्लाह कहता है कि रोजेदार को उसके रोजे का बदला हम स्वयं देंगें। इसे कुरआन का महीना भी कहा जाता है। रमजान में पांचों वक्त की नमाजके अलावा इशां की नमाज के बाद रात्रि में बीस रकात तरावीह में कुरआन का पूरे माह सुनना जरूरी है। तरावीह के लिए हाफिज मौखिक रूप से कुरआन नमाज के दौरान पढ़ता है और बाकी नमाजी उसे सुनते हैं। तरावीह के दौर तीन, सात, पन्द्रह, इक्कीस, पच्चीस, सत्ताईस और उन्तीस दिन के होते हैं। एक रात में पूरा कुरआन पढऩे और सुनने को सवीना कहते हैं जो कम ही स्थानों पर कराया जाता है। रमजान में कुरआन की तिलावत भी अहम इबादत है। वहीं रोजा अफ्तार करवाने में भी बड़ा सवाब है। लोग अफ्तार पार्टियां भी आयोजित करते हैं। रमजान में दिखावे को अल्लाह पंसद नहीं करता।

पवित्र माह रमजान आज से प्रारंभ हो गाया है। मस्जिदों में इस माह के लिए विशेष तैयारियां हो गईं हैं, नया रंग रोगन किया गया है। मुस्लिम समाज ने घरों में सजावट कर ली है। आज 7 जून को चांद देखते ही मुस्लिम समाज रोजे रखना शुरु कर दिए। साथ ही 30 वें दिन चांद देखकर ही रमजान महीना खत्म करेंगे। 6 जून को आसमान पर रमजान का चांद नजर आते ही तराबियों का दौर शुरू हो गया और रात्रि में सेहरी करके मुस्लिम धर्मावलंबियों ने रोजा रखा। खुदा की इबादत के महीने रमजान का चांद सोमवार को दिख गया। इसके साथ ही रमजान का पवित्र माह भी शुरू हो गया है। 10 जून को रमजान महीने के पहले जुमे की नमाज शहर के मस्जिदों में अदा की जाएगी। इस दिन मुस्लिम भाई रोजे रखकर मस्जिदों में खुदा की इबादत करेंगे। यह पाक महीना है। इस माह में खुदा की इबादत करने से अल्लाह की रहमत बरसती है।
रमजान का यह है महत्व -
रमजान अल्लाह की इबादत का महीना है। इस महीने में इबादत करने का महत्व आम महीनों की तुलना में कई गुना होता है। क्योंकि रमजान खाने और पानी को त्याग कर अल्लाह की इबादत करने का महीना है। इससे की इंसान भूखे की भूख और प्यासों की प्यास का महत्व समझ सके। साथ ही उनकी मदद करने के लिए तत्पर हो सके। - रोजे में नजरों से गलत न देखें, कानों से गलत न सुनें, जुबान से गलत न बोलें, दिल से, दिमाग से गलत न सोचें। ताकि रूह पवित्र हो सके। जब रूह और जिस्म पवित्र होगा। तब यह खुद भी समझा जा सकता है। एक रोजेदार दूसरे इंसानों के लिए भी हमदर्द होगा। और उसकी इबादत अल्लाह की बारगाह में कबूलियत का दर्जा हासिल करेगी। रहमतों और बरकतों का महीना रमजान है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। बुराइयों से तौबा कर अल्लाह की इबादत करने वाले माह रमजान का मुस्लिमों में खास महत्व है। रमजान का महीना बेहद पाक और रहमतों वाला होता है। रमजान में एक नेकी का सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है। नफिल इबादत का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है। रमजान में शयातीनों को अल्लाह कैद कर देता है ताकि लोग आसानी के साथ रोजा रख सकें, तरावीह अदा कर सके, और कुरआन पाक की तिलावत, जिक्र आदि इबादत के काम अंजाम दे सकें। रमजानका महीना 29 या 30 दिन का होता है। जो चांद दिखने के साथ शुरूहोता है अगला चांद दिखने के बाद दूसरे दिन ईद मनाई जाती है। रात के आखरी पहर सुबह सादिक से पहले सेहरई (हल्का खाना) खा करके रोजे की नीयत करके रोजा रखा जाता है। रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है।रोजा आंख, हाथ, पैर, दिल, मुंह सभी का होता है ताकि रोजा रखने वाला इंसान हमेशा बुराई से तौबा करता रहे। रोजा सूरज निकलने से लेकर सूरज डूबने तक का होता है। इस दौरान वह कुछ खा पी नहीं सकता। रोजे की शुरुआत में फजर की नमाज होती है। रोजा खोलने के वक्त मगरिब की नमाज होती है। रमजान की इबादतेंरमजान में रोजा अहम इबादत है। रमजान अल्लाह तआला का महीना है। अल्लाह कहता है कि रोजेदार को उसके रोजे का बदला हम स्वयं देंगें। इसे कुरआन का महीना भी कहा जाता है। रमजान में पांचों वक्त की नमाजके अलावा इशां की नमाज के बाद रात्रि में बीस रकात तरावीह में कुरआन का पूरे माह सुनना जरूरी है। तरावीह के लिए हाफिज मौखिक रूप से कुरआन नमाज के दौरान पढ़ता है और बाकी नमाजी उसे सुनते हैं। तरावीह के दौर तीन, सात, पन्द्रह, इक्कीस, पच्चीस, सत्ताईस और उन्तीस दिन के होते हैं। एक रात में पूरा कुरआन पढऩे और सुनने को सवीना कहते हैं जो कम ही स्थानों पर कराया जाता है। रमजान में कुरआन की तिलावत भी अहम इबादत है। वहीं रोजा अफ्तार करवाने में भी बड़ा सवाब है। लोग अफ्तार पार्टियां भी आयोजित करते हैं। रमजान में दिखावे को अल्लाह पंसद नहीं करता।
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