चांदुर रेल्वे- (शहेजाद खान)-/

एक महीने तक चलने वाला बरकतों का
महीना रमजान मंगलवार से शुरू हो गया। इससे पहले लोगों ने सोमवार की शाम से ही रमजान की
तैयारियां शुरू कर दी। मंगलवार को तड़के अजान से पहले लोग उठे और सहरी खाई। इसके साथ ही पहले रोजे की शुरुआत हो गई।
रमजान का चांद दिखते ही बरकतों का महीना रमजान शुरू होता है और ईद का चांद देखकर खत्म होता है। इस महीने में सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है और रात में विशेष नमाज अदा की जाती है जिसे तरावीह कहते हैं। इस महीने के खत्म होने पर ईदुल फितर का त्योहार मनाया जाएगा। इस पूरे माह मुस्लिम धर्मावलंबी रोजा, नमाजों, तरावीह और कुरआन की तिलावत की पाबंदी करते हैं। यह महीना इस्लाम के सबसे पाक महीनों में शुमार किया जाता है। इस्लाम के सभी अनुयाइयों को इस महीने में रोजा, नमाज, फितरा आदि करने की सलाह दी गई है।
रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में दस-दस दिन आते हैं। हर दस दिन के हिस्से को अशरा कहते हैं जिसका मतलब अरबी में 10 है। इस तरह इसी महीने में पूरी कुरान नाजिल हुई जो इस्लाम की पाक किताब है। कुरान के दूसरे पारे की आयत नंबर 183 में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी बताया गया है। रोजा सिर्फ भूखे, प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि गलत काम से बचना भी है। इसका मतलब हमें हमारे शारीरिक और मानसिक दोनों को नियंत्रण में रखना है। कुरान में इस मुबारक महीने में किसी तरह के झगड़े या गुस्से से न सिर्फ मना किया गया है बल्कि किसी से गिला शिकवा है तो उससे माफी मांग कर समाज में एकता कायम करने की सलाह दी गई है। इसके साथ एक तय रकम या सामान गरीबों में बांटने की हिदायत है जो समाज के गरीब लोगों के लिए बहुत ही मददगार है।
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