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Tuesday, June 7, 2016

मथुरा हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ जांच की मांग की खारिज

   

देहली /---  :







मथुरा हिंसा की सीबीआइ जांच के आदेश से सुप्रीम कोर्ट ने आज इनकार किया है. मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर आज सुनवाई करने पर सहमति जताई थी जिसमें मथुरा में हुई हिंसा की घटना की सीबीआइ जांच की सिफारिश करने का समाजवादी पार्टी सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी. आपको बता दें कि मथुरा में हुई हिंसा में एक पुलिस अधीक्षक समेत दो पुलिस अधिकारियों और दो दर्जन से अधिक अतिक्रमणकारियों की मौत हुई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि वह इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट जाएं. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले पर टिप्पणी की और कहा कि क्या आपकी याचिका में यह कहा गया है कि राज्य सरकार का कोई भी ऐसा एक्शन है जिससे यह ज्ञात हो कि उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा कि ये मामला राज्य का विषय है, केंद्र सरकार अपनी ओर से सीबीआइ जांच के आदेश देने पर विचार नहीं कर सकती है.

न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की अवकाश पीठ ने कहा कि उसका इरादा कोई आदेश पारित करने का नहीं है और उसने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इसके लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख करें. याचिका दायर करने वाले वकील एवं दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से उपस्थित वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने कहा कि मथुरा में बडे पैमाने पर हिंसा की खबर आई है और सबूतों के साथ छेडछाड की जा रही है.

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार सीबीआई जांच की शुरुआत नहीं कर रही है और राज्य की जांच एजेंसियां ‘‘अपना काम सही ढंग से नहीं कर रही हैं.’ इस पीठ ने कहा, ‘‘आपकी याचिका से ऐसा कोई सबूत नहीं मिलता जिससे पता चले कि राज्य जांच एजेंसी की ओर से कोई कोताही है. बिना किसी सबूत के अदालत दखल नहीं दे सकती.’

पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे याचिका वापस लें और इसे वापस लिया हुआ करार दिया. देश की सबसे बडी अदालत ने याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए कल सहमति जताई थी. बीते दो जून को मथुरा के जवाहरबाग में अतिक्रमणरोधी अभियान के दौरान भडकी हिंसा में पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी और धानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव सहित 29 लोग मारे गए थे। माना जाता है कि यह अतिक्रमण ‘आजाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही’ नामक संगठन की ओर से कर लिया गया था. उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था कि न्यायालय इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है क्योंकि ‘सच्चाई, घटना के असली कारण तथा कार्यपालिका, विधायिका एवं कथित समूह के बीच सांठगांठ का पता लगाना जरुरी है. ‘

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